अपाहिज कठपुतली

 


आप जानते हैं अपाहिज कौन होता है??
किसी कहते हैं अपाहिज??

अगर हां,तो मैं आपको बताना चाहूंगी अपाहिज की नई परिभाषा।
असल में अपाहिज वो नही होता जिसका कोई अंग खराब होजाए या काम ना करे।

असल में अपाहिज होती हैं लड़कियां।
जी हां,यूं चौंकिए नहीं ना ही मुझे हैरत या गुस्से से देखिए।
एक औरत महज़ एक कटपुतली बंकर रह जाती है,अपने पति और परिवार की।
वो कटपुटली जो बेजान है या यूं कहिए अपाहिज है।
वो खुदसे कोई डिसीजन नहीं ले सकती,क्योंकि जो लेती है वो परिवार वालों(यानी की ससुराल वालों) को अधिकतर नामंजूर होता है।

शादी के वक्त सात वचनों में से एक वचन भी यही स्पष्ट करता है जब मुझे(लड़की) अपने मायके (यानी अपने मां बाप के घर) जाना होगा,तो पहले मैं अपने पति और सास ससुर से पूछूंगी,उन्होंने अनुमति दी तब ही मैं अपने घर जा सकती हूं।

खेल देखिए तकदीर का,जिन मां बाप ने उसे पाला पोस कर बड़ा किया,अपनी जिंदगी लूटा दी ,आज उन्ही मां बाप से मिलने के लिए बेटी तरस जाती है।



कल तक जो मां बाप उसकी हर इच्छा वक्त से पहले पूरी कर देते थे,आज उन्ही मां बाप की आंखें अपनी बिटिया को देखने और उसके साथ वक्त बिताने के लिए तरस जाती हैं।

अजीब कशमकश है जिंदगी की। कहने को सब है पर फिर भी कुछ अधूरा है,आज बेटी हूं इसलिए ये अंतर हो रहा है।
कल तक जिनकी जिम्मेदारी मैं थी,आज वो मेरी जिम्मेदारी हैं।
फिर भी इस काल चक्र ने मुझे ऐसा जकड़ा है,क्यों हूं बेटी मैं इस जिंदगी ने सोचने पर मजबूर छोड़ा है।
काश होती मैं भी पैदा एक बेटा बंकर,तो आज किसी का मुंह ना ताकना पड़ता।
अपने ही मां बाप से मिलने या उनके लिए कुछ करने को खुद को लाचार ना पाया होता।
नम हो उठती हैं वो आंखें फोन पर महज़ आवाज़ सुनकर,और रोती है आत्मा ये सोच कर के बेटी कब आएगी तू अपने घर।
माना वो तेरा ससुराल, है अपना घर पर तेरा मायका भी पराया नही,अब भी गूंजती हैं यहां तेरी किलकारियां यहां।
कहने को बेटियां देवी हैं,पूजनीय हैं,पर ये सब सिर्फ किताबी बातें हैं।
असल में तो बेटियां ससुराल वालों की अपाहिज कठपुतलियां हैं।


अमिता शर्मा

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