What leads to divorce/ आजकल रिश्ते इतने आसानी से क्यूं टूट जाते हैं

रिश्तों में अक्सर दरार क्यूं आती है?? क्या किसी ने कभी सोचा है??





अक्सर हम कहते हैं के वो लोग अब साथ नहीं हैं या फिर उनका डाइवोर्स हो गया है,पर ऐसा क्या होता है आखिर की बात इस नौबत तक आ पहुंचती है???

हम अक्सर चीज़ों को अपने अहंकार (ईगो) पर ले जाते हैं । इस बात को एक उदाहरण के साथ समझेंगे।

शिवांगी और शुभम की शादी को 4 साल होगये, शुरुआत का साल कुछ ठीक बिता पर उसकी बाद आपस में खटपट बाद गई। कभी इसका कारण होती थी सासू मां तो कभी बीवी का मयेका,कभी नंद का चुगली करना तो कभी साले साहब का फोन ना आना। लड़ाई के कारण कुछ इस प्रकार बढ़ते गए। अब तो ऐसा होने लगा के छोटी छोटी बात पर भी लड़ने लगे दोनों,अब बात हाता पाई तक पहुंच गई। हर बार यही होता यदि शुभम किसी बात पर गुस्सा हो जाता और शिवांगी उसके हिसाब से हां में हां ना मिलती,तो उसे बहुत गुस्सा आता और ईगो को चोट भी पहुंचती के इस्नी औरत होते हुए मेरी बात नहीं सुनी/मेरे हिसाब से काम कैसे नहीं किया । अब भारत में तो हम रहते ही हैं और कहीं अपने तो कहीं पड़ोसी के घर में पति को अपनी पत्नी को पीटते हुए देख ही लेते हैं,जहां से ये बात ज़हन में बैठ जाती है कि भाई ना सुने तो दो खींच के कान के नीचे। बस कभी ना कभी कहीं ना कहीं अपनी लाइफ में अप्लाई भी कर लेते हैं। बस इसी के चलते शुभम और शिवांगी के बीच तनाव बढ़ता गया।

शिवांगी आज के ज़माने के ख्यालों वाली थी तो शुभम पुराने विचार रखता था। शिवांगी के हिसाब से गलत गलत होता है चाहे जो भी कहे या करे, छोटा हो या बड़ा और शुभम के हिसाब से शिवांगी को हमेशा चुपचाप सब सुनते और सेहते रहना चाहिए क्यूंकि वो बहू है घर की और सालो साल से यही प्रथा चली आ रही है इसलिए उसे इसी तरह से रहना चाहिए। बस इस सोच के मतभेद के कारण अकसर वाद विवाद होजता।
धीरे धीरे नौबत ये आगई के दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। अंदर ही अंदर दोनों जल रहे थे गुस्से से,परेशान थे अपनी इस निर्णय से । जानते थे एक दूसरे के बगैर आधा घंटा नहीं बिता सकते फिर पूरी ज़िन्दगी एक दूसरे के बगैर कैसे रह पाएंगे,फिर भी रिश्तों के आगे अहंकार की जीत हो गई।

गुस्सा और अहंकार सब बर्बाद कर देता है,फिर चाहे वो रिश्ता हो,कोई सामान,हमारा या अपनों का कीमती वक़्त,ज़िन्दगी। जिस प्रकार छोटी सी चिंगारी कब आग बंजाती है पता नहीं चलता उसी प्रकार कुछ मिनट का गुस्सा कितनी ज़्यादा तबाही कर सकता है उसका आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते।

इसलिए गुस्से और अहंकार को खुद से दूर रखें। किसी भी कारण वश अपने लोगों के बीच दूरियां ना आने दें ना ही अपना और अपनों का कीमती वक़्त बर्बाद ना होने दें।

कुछ चीज़ों/ मुश्किलों का बीच का हल निकाल कर स्तिथि ठीक की जा सकती है।

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