थोड़ा प्यार थोड़ी टकरार

हर रिश्ते की शुरुआत एक खूबसूरत  पल से होती है।
शुरू शुरू में नया प्यार होता है नया खुमार होता है, क्योंकि प्यार परवान चढ़ा होता है इस वक़्त,ना वक़्त का पता होता है ना आस पास के लोगों की सुध होती है ।
हर दिन  ज़िन्दगी में नया एहसास दिलाता है ये नया नया प्यार।
हर रोज़ पत्नी खुद को टिप टॉप रखती है,माथे की बिंदी हो,या होटों की लिपस्टिक,या हथेलियों में चूड़ियां,या बने हुए बाल,हर चीज का ध्यान रखती है। पति भी दफ्तर से सही समय पर वापस आंने की जुगाड बनाते हैं।





पत्नी की कोशिश रहती है आज पति की मनपसंद पनीर की सब्जी बनती हूं,या आज उनके पसंद की मालाई कोफ्ते बनती हूं। पति भी एक अच्छे आदर्श पति की तरह ध्यान रखते हुए कभी पत्नी के लिए गुलाब का फूल ले आते हैं,तो कभी उन्हें बाहर घूमने ले जाते हैं,पत्नी का ध्यान रखते हुए कभी बाहर से भी खाना ऑर्डर कर लेते हैं।

परिवार के साथ साथ एक दूसरे को वक़्त देना भी बहुत ज़रूरी है, क्यूंकि मज़बूत बनाना ये जोड़ी है। अगर एक दूसरे को वक़्त नहीं देंगे तो एक दूसरे को समझ भी नहीं पाएंगे।

देखते देखते बीत जाता है एक साल,और आजाती है रिश्ते में नई ढाल यानी बच्चा (ज़रूरी नहीं है कुछ लोग फ़ैमिली प्लानिंग लेट करते हैं)। कहते हैं बच्चे फरिश्ते होते हैं,पर अक्सर ये फरिश्ते बात और बिगाड़ देते हैं। अगर पति हाथ बिल्कुल ना बटाएं तो पत्नी जी बहुत आग बबूला हो जाती हैं ,बच्चे की ज़िम्मेदारी,घर परिवार की जिम्मदारी,पति की ज़िम्मेदारी, सब एक साथ संभालना और सबके ताने भी सुनना। इन बातों का प्रभाव बीतते वक़्त के साथ रिश्ते को फीका कर देता है,जिस डोर ने उन्हें बांधा था,यानी कि प्यार वो कमज़ोर होने लगती है।





बड़ती ज़िम्मेदारियों के साथ हम खुदको कहीं खो देते हैं। अपने बेटर हॉफ के साथ अपनी परेशानियां बाटना बंद कर देते हैं और हर बात या हर इंसान का गुस्सा अपने जीवनसाथी पर निकाल देते हैं।
नतीजा ये होता है के स्तिथि सुधरने की जगह और बिगड़ जाती हैं और हमें पता भी नहीं चलता।

धीरे धीरे खटास इतनी बढ़ जाती है के रिश्ते में दूरियां आने लगती हैं।
इसी वजह से बहुत सी शादियां टूट भी जाती हैं।

अपनी रिश्ते की डोर  को फीका ना पड़ने दें। जब भी बात बिगड़ती है दोनों लोग साथ बैठ कर बात चीत करिए और अपने रिश्ते की मिठास को कड़वाहट में ना बदलने दें।
                                              - Mental Mom

Comments

  1. Mentioned perfectly every thing in this article. It is really difficult to manage.

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    1. Thank you Sir,yes I agree things get difficult and messed up in life as our responsibilities increases.

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  2. Though am not married but more often aesa hota hai...
    But exceptions are always there and its human nature ki hum negativity ko jyda dkhte n sochtey hai...
    I believe ki mutual understanding and concern hona ek dusre k lye bhut zaruri hai to make any relationship lovely for ever...

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    1. Right said Sir,its a human nature that we get attracted to negative side more often instead of concentrating on the positive aspects of our life. It's important to have a constant and positive communication between both the partners to run a relationship on positive note.

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